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अमृतसर वाघा बॉर्डर जलियांवाला बाग।

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जलियांवाला बाग हत्याकांड 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर में हुआजो भारतीय इतिहास के सबसे काले दिनों में से एक है। बैसाखी के दिनब्रिगेडियर-जनरल रेजिनल्ड डायर के आदेश परब्रिटिश सैनिकों ने रॉलेट एक्ट के विरोध में बाग में शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र हुए निहत्थे लोगों पर बिना चेतावनी गोलियां चलाईंजिसमें सैकड़ों लोग मारे गए और हज़ारों घायल हुए।

अमृतसर के गोल्डन टेम्पल (श्री हरिमंदिर साहिब) की स्थापना 16वीं शताब्दी में चौथे सिख गुरुगुरु राम दास जी द्वारा की गई थी और 1604 में पांचवें गुरु अर्जन देव जी ने इसे पूर्ण किया। यह सिखों का सबसे पवित्र तीर्थस्थल हैजो 19वीं सदी में महाराजा रंजीत सिंह द्वारा मढ़े गए सोने के लिए प्रसिद्ध है।

वाघा बॉर्डर भारत (अमृतसर) और पाकिस्तान (लाहौर) के बीच ऐतिहासिक रेडक्लिफ रेखा पर स्थित एक प्रमुख सीमा चौकी हैजो 1947 में विभाजन के बाद अस्तित्व में आई। यह ग्रैंड ट्रंक रोड पर स्थित हैजिसका उपयोग विभाजन के दौरान शरणार्थियों द्वारा किया गया था। 1959 से यहां प्रतिदिन प्रसिद्ध ‘बीटिंग रिट्रीट’ समारोह आयोजित होता हैजो दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग और तनाव का प्रतीक है।

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अमृतसर वाघा बॉर्डर जलियांवाला बाग।